हो जिसे धर्म से प्रेम कभी, वह कुत्सित कर्म करेगा क्या?
बर्बर कराल, दंष्ट्री बन कर, मारेगा और मरेगा क्या?
पर हाय मनुज के भाग्य, अभी तक भी, खोटे के खोटे हैं,
हम बड़े बहुत बाहर लेकिन, भीतर छोटे के छोटे है।
~रामधारी सिंह 'दिनकर'
I'm writing easy..Guess you'd have to take it easy. Don't leave those irrelevant nasty comments. Relevant-nasty should be fine :) Chuck all of that...just have fun!
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